Study Leave Rules in Hindi: राजस्थान अध्ययन अवकाश नियम 2026

Jan 28, 2026
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Study Leave Rules in Rajasthan (RSR Rule 110-126): अध्ययन अवकाश नियम, पात्रता, बॉन्ड शर्तें एवं अवकाश वेतन गणना

राजस्थान सरकार के अंतर्गत सेवारत नियमित राज्य कर्मचारियों को अपने पद, विभाग अथवा लोक प्रशासन के हित में उच्च तकनीकी, वैज्ञानिक या विशेष अध्ययन और शोध (Research/Higher Studies) करने हेतु जो दीर्घकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता है, उसे अध्ययन अवकाश (Study Leave) कहा जाता है।

अक्सर कर्मचारियों के मन में यह संशय रहता है कि क्या प्रोबेशनर कर्मचारी को अध्ययन अवकाश मिल सकता है, संपूर्ण सेवाकाल में यह कितने समय के लिए देय होता है, क्या इस दौरान पूरा वेतन मिलता है, तथा इसके लिए राज्य सरकार के साथ कितने रुपये और कितने समय का सेवा बॉन्ड (Service Bond) भरना पड़ता है।

यह संदर्भ मार्गदर्शिका राजस्थान सेवा नियम (RSR), 1951 के नियम 110 से 126 (भाग-1, अध्याय 11), वित्त विभाग (नियम प्रभाग) और कार्मिक विभाग (DoP) के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार अध्ययन अवकाश की शर्तों, अवकाश वेतन, बॉन्ड विलेख और प्रशासनिक प्रक्रिया का संपूर्ण विधिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

1. विधिक आधार एवं मूल उद्देश्य (Statutory Framework)

  • RSR नियम 110 से 126: अध्ययन अवकाश राजस्थान सेवा नियमों के अध्याय 11 में विशेष अवकाश के रूप में विहित है।
  • स्वीकृति का मूल उद्देश्य: यह अवकाश किसी सामान्य शैक्षणिक डिग्री के लिए नहीं, बल्कि ऐसे अध्ययन, विशेष पाठ्यक्रम या अनुसंधान के लिए स्वीकृत किया जाता है जो राज्य सरकार के कार्यों, लोक सेवा की गुणवत्ता या विभाग के तकनीकी/प्रशासनिक दायित्वों से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित हो।
  • अधिकार के रूप में दावा नहीं: RSR नियम 111 के अनुसार अध्ययन अवकाश किसी भी कर्मचारी का विधिक अधिकार नहीं है। इसे केवल जनहित (Public Interest) और विभाग की कार्यप्रणाली पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने की शर्त पर ही स्वीकृत किया जाता है।

2. पात्रता की अनिवार्य शर्तें एवं अधिकतम अवधि (Eligibility & Maximum Limits)

नियम / मानदंड विधिक सीमा (Official Rule) प्रशासनिक शर्तें
न्यूनतम नियमित सेवा कम से कम 3 वर्ष की नियमित सेवा संवर्ग पद पर संतोषजनक स्थायीकरण (Confirmation) पूर्ण होना अनिवार्य।
प्रोबेशनर-ट्रेनी की स्थिति पूर्णतः अपात्र (Not Eligible) 2 वर्ष के प्रोबेशन प्रशिक्षण काल में अध्ययन अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
एक समय में अधिकतम अवधि अधिकतम 12 माह (1 वर्ष) एक बार में सामान्यतः 12 माह से अधिक का अवकाश स्वीकृत नहीं होता (विशेष अनुमति से 24 माह तक बढ़ाया जा सकता है)।
संपूर्ण सेवाकाल में कुल सीमा अधिकतम 24 माह (2 वर्ष) सामान्य संवर्ग के कार्मिकों के लिए पूरे सेवाकाल में अधिकतम 24 माह।
चिकित्सा सेवा संवर्ग (Medical Cadre) अधिकतम 36 माह (3 वर्ष) सेवारत चिकित्सकों (Doctors) को सुपर-स्पेशियलिटी/पीजी पाठ्यक्रम हेतु 36 माह तक अनुमत।
सेवानिवृत्ति की निकटता कम से कम 3 वर्ष शेष होना अनिवार्य अध्ययन अवकाश से लौटने के बाद कार्मिक के सेवाकाल में कम से कम 3 वर्ष की शेष सेवा बची होनी चाहिए।

3. वित्तीय प्रावधान: अध्ययन अवकाश वेतन (Study Leave Salary Calculation)

अध्ययन अवकाश के दौरान मिलने वाले वेतन का स्वरूप नियमित कार्यवेतन से भिन्न होता है:

  • अर्धवेतन अवकाश के समान वेतन (Half Pay Leave Pay): RSR नियम 121 के अनुसार अध्ययन अवकाश के दौरान कर्मचारी को अर्धवेतन अवकाश (HPL) के बराबर अवकाश वेतन देय होता है, अर्थात:
    अध्ययन अवकाश वेतन = कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Pay) का 50 + उस पर तत्कालीन दर से DA एवं HRA
  • अध्ययन भत्ता (Study Allowance): यदि कर्मचारी को सरकार द्वारा किसी विशिष्ट विदेश या अंतर-राज्यीय उच्च स्तरीय अध्ययन हेतु नामित किया गया हो, तो वित्त विभाग की विशिष्ट स्वीकृति से अतिरिक्त अध्ययन भत्ता देय हो सकता है।
  • छात्रवृत्ति या अन्य सहायता की स्थिति: यदि कर्मचारी को अध्ययन के दौरान किसी विश्वविद्यालय, शोध संस्था या विदेशी निकाय से कोई फेलोशिप, छात्रवृत्ति (Scholarship) या मानदेय प्राप्त होता है, तो प्राप्त राशि के अनुपात में राज्य सरकार द्वारा देय अवकाश वेतन को समायोजित (Reduce/Deduct) किया जाता है।

4. सेवा बॉन्ड (Service Bond) एवं विधिक बाध्यता

अध्ययन अवकाश स्वीकृत करने से पूर्व राज्य सरकार अपने वित्तीय और प्रशासनिक हितों की सुरक्षा हेतु कर्मचारी से एक विधिक बॉन्ड निष्पादित करवाती है:

  1. बॉन्ड प्रपत्र (Form of Bond): RSR के निर्धारित प्रपत्र (Form 7 / परिशिष्ट प्रपत्र) में ₹ 500/- के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर बॉन्ड निष्पादित किया जाता है।
  2. न्यूनतम अनिवार्य सेवा (Mandatory Service Period): कर्मचारी को यह वचन देना होता है कि अध्ययन अवकाश समाप्त होने और डिग्री/प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत वह कम से कम 3 वर्ष की निरंतर अवधि तक राज्य सरकार की सेवा में कार्य करेगा।
  3. बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर वसूली:
    1. यदि कर्मचारी अध्ययन अधूरा छोड़ देता है, डिग्री में असफल रहता है, या लौटने के बाद 3 वर्ष से पूर्व त्यागपत्र (Resignation) दे देता है:
    2. उससे अध्ययन अवकाश काल के दौरान प्राप्त संपूर्ण वेतन, भत्ते, अध्ययन भत्ते एवं उस पर ब्याज की एकमुश्त वसूली राज्य सरकार द्वारा राजस्व बकाया (Arrears of Land Revenue) के रूप में की जाएगी।

5. वार्षिक वेतन वृद्धि, पदोन्नति एवं पेंशन पर प्रभाव

  • पेंशन अर्हक सेवा (Qualifying Service for Pension): RSR नियम 124 तथा राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के तहत अध्ययन अवकाश की संपूर्ण अवधि को पेंशन योग्य अर्हक सेवा माना जाता है।
  • वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment):
    • अध्ययन अवकाश की अवधि के दौरान कोई वास्तविक नकद वार्षिक वेतन वृद्धि आहरित नहीं होती।
    • परंतु अवकाश से सफलतापूर्वक लौटकर कार्यभार ग्रहण करने पर, उस अवधि को नोशनल आधार पर नियमित सेवा मानकर वेतन वृद्धि जोड़ी जाती है (यदि कर्मचारी ने पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया हो)।
  • अन्य अवकाशों के साथ संयोजन: अध्ययन अवकाश को उपार्जित अवकाश (PL), अर्धवेतन अवकाश (HPL) अथवा असाधारण अवकाश (EOL) के साथ संयोजित किया जा सकता है, बशर्ते कुल संयुक्त अनुपस्थिति 28 माह (चिकित्सकों के लिए 36 माह) से अधिक न हो।

6. आवेदन एवं स्वीकृति की प्रशासनिक प्रक्रिया (Workflow)

[कर्मचारी द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान/विश्वविद्यालय में प्रवेश पत्र प्राप्त करना]
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[पाठ्यक्रम का विवरण व विभाग को होने वाले लाभ सहित कार्यालयाध्यक्ष (DDO) को आवेदन]
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[विभागाध्यक्ष (Head of Department) द्वारा प्रकरण का परीक्षण एवं प्रशासनिक विभाग को प्रेषण]
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[वित्त विभाग (Rules Division) एवं कार्मिक विभाग (DoP) की सहमति प्राप्त करना]
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[प्रशासनिक विभाग द्वारा औपचारिक अध्ययन अवकाश स्वीकृति आदेश जारी करना]
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[कर्मचारी द्वारा निर्धारित प्रपत्र में सेवा बॉन्ड (Service Bond) निष्पादित करना]
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[सेवा पुस्तिका (Service Book) के अवकाश पृष्ठ पर लाल स्याही में प्रविष्टि एवं कार्यमुक्ति]

7. DDO एवं आहरण संवितरण अधिकारी हेतु ऑडिट चेकलिस्ट (DDO Checklist)

अध्ययन अवकाश का वेतन बिल पास करने अथवा कार्यमुक्ति से पूर्व DDO को निम्नलिखित अभिलेखों की जांच करनी चाहिए:

  • क्या अध्ययन अवकाश की स्वीकृति सक्षम प्रशासनिक विभाग एवं वित्त विभाग के स्तर से जारी आदेश पर आधारित है (केवल DDO स्तर से देय नहीं)?
  • क्या कर्मचारी ने न्यूनतम 3 वर्ष की नियमित संतोषजनक सेवा पूर्ण कर ली है?
  • क्या निर्धारित प्रारूप में 3 वर्ष की अनिवार्य सेवा का बॉन्ड पेपर और सक्षम गवाहों के हस्ताक्षर संलग्न हैं?
  • मासिक अवकाश वेतन बनाते समय क्या बेसिक पे को नियमानुसार 50% (अर्धवेतन) पर आहरित किया गया है?
  • क्या कर्मचारी से इस आशय का शपथ पत्र ले लिया गया है कि वह अध्ययन के दौरान कोई अन्य सवेतन नौकरी या अप्रमाणित फेलोशिप नहीं ले रहा है?
  • पाठ्यक्रम समाप्ति के उपरांत क्या परीक्षा उत्तीर्ण करने का मूल प्रमाण पत्र अथवा कोर्स कंप्लीशन रिपोर्ट सेवा पुस्तिका में संलग्न की गई है?

अस्वीकरण (Disclaimer): यह मार्गदर्शिका राजस्थान सेवा नियम (RSR), 1951 के नियम 110 से 126 तथा वित्त विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी परिपत्रों का एक विश्लेषणात्मक व शैक्षणिक प्रारूप है। किसी भी आधिकारिक निर्णय अथवा कानूनी विवाद की स्थिति में वित्त विभाग के मूल सेवा नियमों एवं परिपत्रों (finance.rajasthan.gov.in) को ही वैधानिक आधार माना जाए।

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