राजस्थान सरकारी कर्मचारी ACP नियम क्या हैं? 9, 18 और 27 साल का पूरा गणित
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Rajasthan ACP Scheme Rules: सुनिश्चित कॅरियर प्रगति योजना (Rule 14-15), 9-18-27 वर्ष स्लैब, पे-फिक्सेशन सूत्र एवं ऐतिहासिक ACP बनाम MACP गाइड
राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में सेवारत राज्य कर्मचारियों एवं अधिकारियों को पदोन्नति के अवसरों के अभाव में उत्पन्न होने वाले सेवा गतिरोध (Career Stagnation) से सुरक्षित करने तथा समयबद्ध वित्तीय उन्नयन प्रदान करने हेतु सुनिश्चित कॅरियर प्रगति योजना (Assured Career Progression - ACP Scheme) का विधिक प्रावधान लागू किया गया था।
यद्यपि राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2023 से नियम 14 को प्रतिस्थापित कर संशोधित MACP योजना लागू की गई है, तथापि 01.04.2023 से पूर्व देय वित्तीय अपग्रेडेशन के एरियर मामलों, पेंशन पुनर्गणना, पुरानी सेवा प्रविष्टियों, तथा एसीपी के ऐतिहासिक विधिक प्रावधानों के संबंध में कर्मचारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों (DDO) के मध्य अनेक तकनीकी संशय बने रहते हैं। प्रायः यह पूछा जाता है कि पुरानी ACP योजना के तहत पे-लेवल का निर्धारण किस प्रकार होता था, मंत्रालयिक एवं अधीनस्थ संवर्गों (नियम 14) तथा राज्य सेवा के राजपत्रित अधिकारियों (नियम 15) के लिए क्या अलग-अलग नियम थे, तीसरी संतान होने पर 3 वर्ष के आस्थगन (Deferment) का नियम कैसे लागू होता है, तथा यदि किसी कर्मचारी ने नियमित पदोन्नति से इनकार किया हो तो उसकी पूर्व स्वीकृत ACP पर क्या प्रभाव पड़ता है।
यह संदर्भ मार्गदर्शिका राजस्थान सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2008 (नियम 19), राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 (नियम 14 एवं 15), वित्त विभाग (नियम प्रभाग) के आदेश संख्या F. 15(1)FD/Rules/2013 दिनांक 06.10.2015, तथा संबंधित ऐतिहासिक परिपत्रों के आलोक में मूल ACP योजना, वेतन निर्धारण सूत्रों, विधिक अपवादों और DDO सत्यापन प्रक्रिया का संपूर्ण प्रशासनिक व वित्तीय विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
1. विधिक आधार एवं वैधानिक पृष्ठभूमि (Statutory Framework)
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: राजस्थान में पंचम वेतन आयोग के दौरान 25.01.1992 से 'चयन वेतनमान' (Selection Scale - 9, 18, 27 वर्ष) की व्यवस्था लागू थी, जिसे छठे वेतन आयोग में 01.01.2006 से संशोधित वेतन नियम 2008 के नियम 19 के तहत ACP योजना के रूप में पुनर्गठित किया गया।
- 7वें वेतन आयोग में विधिक स्थिति: राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के तहत इसे दो विशिष्ट नियमों में विभाजित किया गया था:
- नियम 14: अधीनस्थ, मंत्रालयिक एवं चतुर्थ श्रेणी सेवा संवर्गों के कर्मचारियों हेतु ACP।
- नियम 15: राज्य सेवा के अधिकारियों (State Service / Gazetted Officers) हेतु ACP (06.10.2023 की अधिसूचना द्वारा विलोपित होने से पूर्व तक)।
- योजना की मूल प्रकृति: ACP विशुद्ध रूप से एक वित्तीय उन्नयन (Financial Upgradation) है। यह वास्तविक पदोन्नति (Functional Promotion) नहीं है; अतः ACP स्वीकृत होने पर कर्मचारी का पदनाम, पदीय दायित्व, अधिकार और संवर्ग वरिष्ठता अपरिवर्तित रहते हैं।
2. नियमित अर्हक सेवा एवं वित्तीय अपग्रेडेशन के चरण (9-18-27 Years Schedule)
मूल ACP योजना के अंतर्गत राज्य कर्मचारियों को उनकी नियमित नियुक्ति तिथि से संतोषजनक सेवा पूर्ण करने पर तीन वित्तीय अपग्रेडेशन अनुमत किए जाते हैं:
| वित्तीय अपग्रेडेशन का चरण | आवश्यक न्यूनतम नियमित अर्हक सेवा | विधिक अर्हता एवं शर्तें |
| प्रथम ACP (1st ACP) | 9 वर्ष की नियमित सेवा | संवर्ग के पद पर नियमित कार्यग्रहण तिथि से (नियमित प्रोबेशन काल सहित)। |
| द्वितीय ACP (2nd ACP) | 18 वर्ष की नियमित सेवा | सेवा में नियमित नियुक्ति से 18 वर्ष (अथवा प्रथम पदोन्नति/ACP के उपरांत 9 वर्ष)। |
| तृतीय ACP (3rd ACP) | 27 वर्ष की नियमित सेवा | नियमित नियुक्ति तिथि से कुल 27 वर्ष की संतोषजनक एवं दोषमुक्त सेवा। |
नियमित पदोन्नति के साथ समायोजन (Offsetting with Regular Promotion):
- यदि किसी कर्मचारी को 9 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण होने से पूर्व ही संवर्ग में नियमित पदोन्नति (Regular DPC Promotion) मिल जाती है, तो उसकी प्रथम ACP उपभोग (Consumed) मानी जाती है।
- यदि कर्मचारी 18 वर्ष की सेवा पूर्ण होने तक दो नियमित पदोन्नतियां प्राप्त कर चुका है, तो उसे प्रथम एवं द्वितीय दोनों ACPs उपभोग मानी जाती हैं; उसे केवल 27 वर्ष की सेवा पर तृतीय ACP की देयता बनती है।
- यदि 27 वर्ष के संपूर्ण सेवाकाल में कर्मचारी को तीन नियमित पदोन्नतियां मिल चुकी हों, तो उसे ACP योजना के अंतर्गत कोई अतिरिक्त वित्तीय अपग्रेडेशन देय नहीं होता।
3. मूल ACP बनाम नवीन MACP: संरचनात्मक एवं वित्तीय अंतर
01.04.2023 से पूर्व की मूल ACP व्यवस्था और वर्तमान में लागू MACP व्यवस्था के मध्य विधिक अंतर को समझना प्रशासनिक दृष्टि से अनिवार्य है:
| विधिक बिंदु (Parameter) | मूल ACP योजना (RCS Rules 2017 के तहत 01.04.2023 से पूर्व) | संशोधित MACP योजना (01.04.2023 से प्रभावी) |
| पे-लेवल आवंटन का आधार | ग्रेड-पे / पे-मैट्रिक्स तालिका पदानुक्रम: अधिकांश संवर्गों में नियम 14 की निर्धारित तालिका के अनुसार अगला निर्धारित पे-लेवल दिया जाता था। | पदोन्नति पद का पे-लेवल: नियम 14(3) के तहत उसी सेवा संवर्ग में आगामी वास्तविक पदोन्नति पद का पे-लेवल देय होता है। |
| राजपत्रित अधिकारियों का नियम | राज्य सेवा अधिकारियों हेतु पृथक नियम 15 लागू था (सीमित पे-लेवल वृद्धि)। | नियम 15 विलोपित; राजपत्रित एवं अधीनस्थ सभी संवर्ग एकीकृत नियम 14 के अधीन शामिल। |
| आइसोलेटेड पद (Isolated Posts) | पृथक तालिका अनुसार अगला उच्चतर स्तर। | नियम 14(5) की विशिष्ट तालिका अनुसार पे-लेवल देय। |
| एरियर देयता की स्थिति | 01.04.2023 से पूर्व के सभी स्वीकृत प्रकरणों में विधिक वित्तीय एरियर मान्य। | 01.04.2023 से प्रभावी; वित्तीय भुगतान नियमों के अधीन। |
4. मूल ACP योजना में पे-फिक्सेशन का गणितीय सूत्र
मूल ACP स्वीकृत होने पर कर्मचारी का वेतन पे-मैट्रिक्स (Pay Matrix) में निर्धारित करने की विधिक प्रक्रिया निम्नानुसार संपादित की जाती थी:
MACP / ACP Fixation = वर्तमान पे-लेवल में 1 नोशनल इंक्रीमेंट ---------> आगामी पे-लेवल में समान अथवा अगला उच्चतर सेल
चरणबद्ध गणना विधि:
- वर्तमान पे-लेवल में एक इंक्रीमेंट: कर्मचारी को उसके विद्यमान पे-लेवल (Existing Pay Level) में एक कल्पित वार्षिक वेतन वृद्धि (1 Notional Increment) प्रदान की जाती है।
- स्वीकृत ACP पे-लेवल में सेल मिलान: प्राप्त कल्पित मूल वेतन को स्वीकृत किए गए उच्चतर ACP पे-लेवल के कॉलम में देखा जाता है।
- उच्चतर सेल पर फिक्सेशन:
- यदि नए पे-लेवल में ठीक वही राशि उपलब्ध है, तो वेतन उसी सेल पर फिक्स होता है।
- यदि समान राशि उपलब्ध नहीं है, तो नवीन पे-लेवल के ठीक अगले उच्चतर सेल (Immediate Next Higher Cell) पर वेतन निर्धारित किया जाता है।
- एंट्री पे संरक्षण: यदि वर्तमान पे-लेवल में इंक्रीमेंट देने के बाद भी राशि नवीन पे-लेवल के न्यूनतम सेल (Cell-1) से कम रहती है, तो वेतन नवीन पे-लेवल के न्यूनतम (Cell-1) पर फिक्स किया जाता है।
5. दो-संतान नियम का विधिक प्रभाव (Two-Child Norm & 3-Year Deferment)
वित्त विभाग (नियम प्रभाग) के ऐतिहासिक आदेश क्रमांक F. 15(1)FD/Rules/2013 दिनांक 06.10.2015 तथा संशोधित परिपत्रों के अनुसार:
- 3 वर्ष का आस्थगन (3-Year Deferment): यदि किसी कर्मचारी के 01.06.2002 को या उसके पश्चात 2 से अधिक संतान होती हैं, तो उसकी देय ACP को देय तिथि (Due Date) से 3 वर्ष की अवधि के लिए स्थगित (Deferred) कर दिया जाता है।
- परिणामी वित्तीय प्रभाव (Consequential Impact): यह 3 वर्ष का स्थगन केवल उसी एक ACP पर सीमित नहीं रहता; कर्मचारी की परवर्ती आगामी वित्तीय अपग्रेडेशन (उदा. द्वितीय अथवा तृतीय ACP) भी स्वतः 3-3 वर्ष आगे खिसक जाती हैं।
- आस्थगित अवधि का कोई एरियर नहीं: स्थगित रखी गई 3 वर्ष की अवधि का कोई काल्पनिक अथवा नकद वित्तीय एरियर देय नहीं होता।
6. पदोन्नति का परित्याग (Foregoing / Refusal of Regular Promotion)
सेवा नियमों के अनुसार नियमित विभागीय पदोन्नति और एसीपी के मध्य सीधा विधिक संबंध निर्धारित है:
- यदि किसी कर्मचारी को विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) द्वारा नियमित पदोन्नति प्रदान की जाती है और वह अपने व्यक्तिगत कारणों, पदस्थापन स्थल की दूरी अथवा पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पदोन्नति का लिखित परित्याग (Refusal/Foregoing of Promotion) कर देता है:
- तो वह परित्याग की तिथि से ACP योजना के तहत किसी भी वित्तीय अपग्रेडेशन का हकदार नहीं रहता।
- यदि कर्मचारी ने पूर्व में किसी वित्तीय अपग्रेडेशन का लाभ ले लिया था और बाद में पदोन्नति अस्वीकार करता है, तो उसके वित्तीय लाभों को विधिक रूप से वापस लेते हुए पूर्व पे-लेवल पर प्रत्यावर्तित (Revert) किया जा सकता है।
7. DDO एवं नियुक्ति प्राधिकारी हेतु ACP ऑडिट चेकलिस्ट (DDO Inspection Checklist)
ACP स्वीकृति आदेश जारी करते समय और सेवा पुस्तिका (Service Book) में प्रविष्टि दर्ज करते समय DDO को निम्नलिखित विधिक बिंदुओं का परीक्षण करना चाहिए:
- क्या ACP का औपचारिक आदेश संवर्ग के सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority) के हस्ताक्षर से जारी किया गया है?
- क्या कर्मचारी की 9, 18 अथवा 27 वर्ष की नियमित संतोषजनक सेवा की गणना प्रथम नियमित कार्यग्रहण तिथि से सही की गई है?
- क्या इस सेवा अवधि के दौरान लिया गया कोई असाधारण अवकाश (EOL Without Medical Certificate) अथवा डाइज-नॉन (Dies-non) अर्हक सेवा में से घटा दिया गया है?
- क्या कार्मिक के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1958 के तहत कोई विभागीय जांच (Rule 16/17) अथवा न्यायालयी आपराधिक वाद लंबित तो नहीं है?
- क्या 01.06.2002 के पश्चात संतानों की विधिक संख्या का वैध शपथ पत्र पत्रावली में सुरक्षित है?
- क्या वेतन निर्धारण करते समय वर्तमान पे-लेवल में 1 नोशनल इंक्रीमेंट देकर नए पे-लेवल के अगले उच्चतर सेल पर सही पे-फिक्सेशन किया गया है?
- क्या सेवा पुस्तिका के वेतन निर्धारण पृष्ठ पर सक्षम प्राधिकारी के प्रतिहस्ताक्षर सहित कार्यालय आदेश संख्या एवं वित्तीय वर्ष की प्रविष्टि अंकित कर दी गई है?
अस्वीकरण (Disclaimer): यह मार्गदर्शिका राजस्थान सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2008, पुनरीक्षित वेतन नियम, 2017 (नियम 14 एवं 15), तथा वित्त विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं का एक विधिक व प्रशासनिक सार-संक्षेप है। किसी भी आधिकारिक वेतन निर्धारण, एरियर गणना अथवा न्यायिक दावे के संदर्भ में वित्त विभाग के मूल सेवा नियमों एवं परिपत्रों (finance.rajasthan.gov.in) को ही वैधानिक आधार माना जाए।