APAR नियम: ग्रेडिंग, चैनल और ऑनलाइन भरने की पूरी प्रक्रिया

Advertisement
Table of Contents

Rajasthan APAR / ACR Rules: वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियम, राज-काज ऑनलाइन मॉड्यूल, 3-माह का विधिक नियम एवं प्रतिकूल प्रविष्टि विलोपन गाइड

राजस्थान सरकार के अधीन सेवारत समस्त राज्य सेवा, अधीनस्थ, मंत्रालयिक एवं तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के वार्षिक कार्य निष्पादन, सत्यनिष्ठा (Integrity), आचरण एवं पदोन्नति (Promotion / DPC) हेतु उपयुक्तता के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के लिए वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report - APAR), जिसे पूर्व में वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (Annual Confidential Report - ACR) कहा जाता था, एक अनिवार्य एवं संवेदनशील वैधानिक अभिलेख है।

राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के पश्चात अब समस्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों का APAR संधारण राज-काज (RajKaj Portal / SSO ID) के माध्यम से ऑनलाइन, पेपरलेस एवं समयबद्ध व्यवस्था के तहत किया जाता है। इसके बावजूद प्रायः कर्मचारियों और नियंत्रण अधिकारियों के मध्य यह संशय रहता है कि किसी अधिकारी के अधीन मूल्यांकन हेतु न्यूनतम 3 माह का विधिक नियम (3-Month Supervision Rule) कैसे लागू होता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान कई नियंत्रक अधिकारी बदल गए हों तो पृथक-पृथक APAR कैसे भरी जाती है, प्रतिवेदक (Reporting), समीक्षक (Reviewing), एवं स्वीकारकर्ता (Accepting) प्राधिकारियों की पदानुक्रमित शक्तियां क्या हैं, निर्धारित समय-सारिणी (30 जून / 31 जुलाई / 31 अगस्त) के बाद ऑटो-फॉरवर्ड (Auto-Forwarding) का क्या प्रावधान है, प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के 'देव दत्त' (Dev Dutt Case - 2008) निर्णय के अनुसार अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की क्या विधिक प्रक्रिया है, तथा पदोन्नति डीपीसी के समय बेंचमार्क (Outstanding, Very Good, Good) का निर्धारण किस प्रकार होता है।

यह संदर्भ मार्गदर्शिका कार्मिक विभाग (Department of Personnel - DoP, Group A-II/B), राजस्थान सरकार द्वारा समय-समय पर जारी स्थायी आदेशों, परिपत्रों, राज-काज कार्यप्रणाली और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार राजस्थान में APAR संधारण, समय-सीमा, पदानुक्रम, विधिक अपवादों और प्रतिकूल प्रविष्टि निस्तारण का संपूर्ण प्रशासनिक व विधिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।


1. विधिक आधार एवं वैधानिक स्वरूप (Statutory Framework)

  • कार्मिक विभाग (DoP) के स्थायी निर्देश: राजस्थान सिविल सेवा नियमों एवं संवर्ग सेवा नियमों के अधीन प्रत्येक कर्मचारी के कार्य निष्पादन का वार्षिक अभिलेख संधारित करना अनिवार्य है। यह कर्मचारी के सेवा इतिहास का वह स्थायी दस्तावेज है जिसके आधार पर पदोन्नति, स्थायीकरण, चयन वेतनमान/MACP, विदेश प्रतिनियुक्ति और अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Rule 244(2) / Rule 53(1)) का परीक्षण किया जाता है।
  • ACR से APAR में परिवर्तन का विधिक दर्शन: पूर्ववर्ती व्यवस्था में गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) पूर्णतः गोपनीय रखा जाता था और केवल 'प्रतिकूल प्रविष्टि' (Adverse Entry) की सूचना दी जाती थी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय Dev Dutt vs. Union of India (2008 8 SCC 725) के उपरांत गोपनीयता के सिद्धांत को पारदर्शिता के अधिकार में बदलते हुए APAR व्यवस्था लागू की गई, जिसके तहत संपूर्ण प्रतिवेदन एवं श्रेणी (Grading) कर्मचारी को सूचित करना अनिवार्य किया गया है।
  • राज-काज (RajKaj) पर अनिवार्य ऑनलाइन संधारण: वित्त विभाग एवं DoP के आदेशानुसार 01.04.2020 से राज्य के समस्त संवर्गों हेतु भौतिक (Physical Paper) APAR स्वीकार्य नहीं है; इसका संधारण केवल SSO पोर्टल स्थित 'राज-काज' सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षरित (DSC / Aadhaar e-Sign) रूप में ही वैध माना जाता है।
  • सत्यनिष्ठा की विधिक प्रकृति (Integrity Column): APAR में सत्यनिष्ठा का कॉलम सबसे संवेदनशील होता है। यदि किसी अधिकारी द्वारा कर्मचारी की सत्यनिष्ठा को 'संदेहास्पद' (Doubtful) अथवा 'प्रमाणित नहीं' (Not Certified) दर्ज किया जाता है, तो उसके समर्थन में सक्षम प्राधिकारी के पास ठोस अभिलेखीय साक्ष्य, गोपनीय जांच अथवा अनुशासनात्मक कार्यवाही (Rule 16/17 CCA) का लंबित होना विधिक रूप से अनिवार्य है।

2. त्रि-स्तरीय मूल्यांकन पदानुक्रम (Three-Tier Appraisal Hierarchy)

राज-काज APAR प्रणाली में प्रत्येक कर्मचारी का मूल्यांकन तीन क्रमिक स्तरों पर संपादित होता है:

प्राधिकारी का स्तर (Authority) प्रशासनिक स्थिति विधिक दायित्व एवं मूल्यांकन का दायरा
प्रतिवेदित कार्मिक (Appraisee / Officer Reported Upon) स्वयं कर्मचारी / अधिकारी वित्तीय वर्ष के दौरान सौंपे गए कार्यों, वार्षिक लक्ष्यों (Targets), उपलब्धियों (Achievements) एवं विशेष योगदान का संक्षिप्त वस्तुनिष्ठ स्व-मूल्यांकन (Self-Appraisal) राज-काज पर भरकर अग्रेषित करना।
प्रतिवेदक अधिकारी (Reporting Authority) तत्काल नियंत्रण अधिकारी (Immediate Supervisory Officer) कर्मचारी के दैनिक कार्य, कार्यकुशलता, समयबद्धता, सत्यनिष्ठा एवं पदीय आचरण का प्राथमिक परीक्षण कर विस्तृत मंतव्य (Pen-picture) एवं संख्यात्मक ग्रेडिंग (1 से 10) दर्ज करना।
समीक्षक अधिकारी (Reviewing Authority) प्रतिवेदक अधिकारी से ठीक उच्चतर प्रशासनिक अधिकारी प्रतिवेदक अधिकारी के मूल्यांकन का निष्पक्ष परीक्षण करना। यदि वह प्रतिवेदक की ग्रेडिंग से सहमत नहीं है, तो कारणों को दर्ज करते हुए ग्रेडिंग को घटाने अथवा बढ़ाने (Upgrade/Downgrade) का विधिक अधिकार।
स्वीकारकर्ता प्राधिकारी (Accepting Authority) विभागाध्यक्ष (HoD) / प्रशासनिक सचिव / मंत्री महोदय समग्र प्रतिवेदन का अंतिम विधिक अनुमोदन करना। स्वीकारकर्ता का निर्णय अंतिम माना जाता है और उसी के आधार पर अंतिम ग्रेडिंग राज-काज पर लॉक होती है।

3. 3-माह का न्यूनतम पर्यवेक्षण नियम एवं विभिन्न नियंत्रक अधिकारी (The 3-Month Rule)

कार्मिक विभाग के स्थायी नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी द्वारा APAR लिखे जाने हेतु न्यूनतम समयावधि की विधिक बाध्यता निर्धारित है:

न्यूनतम 90 दिन (3 माह) का पर्यवेक्षण नियम:

  • कोई भी प्रतिवेदक अधिकारी (Reporting Authority) किसी कर्मचारी की APAR पर अपनी टिप्पणी केवल तभी दर्ज कर सकता है जब कर्मचारी ने उस अधिकारी के सीधे नियंत्रण में वित्तीय वर्ष के दौरान कम से कम निरंतर 3 माह (90 दिवस) तक कार्य किया हो।
  • यदि कर्मचारी का पर्यवेक्षण काल 3 माह से कम (उदा. 89 दिन) रहा हो, तो वह अधिकारी उस अवधि की APAR लिखने हेतु विधिक रूप से अनधिकृत होता है।

वित्तीय वर्ष के दौरान नियंत्रण अधिकारी अथवा पदस्थापन बदलने की स्थिति (Split APAR):

  • विभाजित APAR (Multiple APARs): यदि वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान किसी कर्मचारी का स्थानांतरण हो जाता है, अथवा उसका प्रतिवेदक अधिकारी बदल जाता है, और कर्मचारी ने दोनों अधिकारियों के अधीन 3-3 माह या उससे अधिक कार्य किया है, तो कर्मचारी को राज-काज पोर्टल पर दोनों अवधियों हेतु पृथक-पृथक APAR (Split APARs) जनरेट कर संबंधित अधिकारियों को प्रस्तुत करनी होती है।
  • गैर-मूल्यांकन प्रमाण पत्र (No Report Certificate - NRC): यदि किसी अवधि (जैसे 1 अप्रैल से 30 जून) में कर्मचारी ने किसी अधिकारी के अधीन 3 माह से कम कार्य किया हो, अथवा वह प्रशिक्षण/लंबी छुट्टी (EOL/मातृत्व अवकाश)/APO रहा हो, तो उस विशिष्ट अवधि हेतु मूल्यांकन नहीं लिखा जाता। ऐसी स्थिति में संस्था प्रधान द्वारा राज-काज पर 'No Report Certificate' (NRC) जारी किया जाता है, जो डीपीसी के समय मान्य होता है।
  • प्रतिवेदक अधिकारी के सेवानिवृत्त / त्यागपत्र देने पर: यदि प्रतिवेदक अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाता है, तो उसे पद छोड़ने की तिथि से अधिकतम 1 माह के भीतर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की APAR लिखनी होती है। 1 माह व्यतीत होने के उपरांत वह APAR दर्ज करने का अधिकार खो देता है और समीक्षक अधिकारी सीधे प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है।

4. राज-काज APAR वार्षिक समय-सारिणी एवं ऑटो-फॉरवर्डिंग नियम (Annual Schedule)

कार्मिक विभाग द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष हेतु APAR संधारण की एक सख्त समय-सारिणी (Activity Calendar) निर्धारित की जाती है ताकि पदोन्नति डीपीसी के समय रिकॉर्ड लंबित न रहे:

चरण / गतिविधि (Activity) कार्य निष्पादन प्राधिकारी विहित अंतिम समय-सीमा (Deadlines)
स्व-मूल्यांकन भरना (Self-Appraisal) प्रतिवेदित कर्मचारी (Appraisee) 30 जून तक राज-काज पर भरकर प्रतिवेदक अधिकारी को ई-साइन प्रेषित करना।
प्रतिवेदन दर्ज करना (Reporting) प्रतिवेदक अधिकारी (Reporting Authority) 31 जुलाई तक अपना मंतव्य एवं ग्रेडिंग दर्ज कर समीक्षक अधिकारी को फॉरवर्ड करना।
समीक्षा पूर्ण करना (Reviewing) समीक्षक अधिकारी (Reviewing Authority) 31 अगस्त तक समीक्षा मंतव्य दर्ज कर स्वीकारकर्ता प्राधिकारी को प्रेषित करना।
अंतिम स्वीकृति (Acceptance) स्वीकारकर्ता प्राधिकारी (Accepting Authority) 30 सितंबर तक अंतिम अनुमोदन कर प्रतिवेदन को डिजिटली लॉक करना।
कर्मचारी को संसूचना (Communication) राज-काज सिस्टम ऑटोमेशन स्वीकृति के उपरांत कर्मचारी की SSO ID पर सम्पूर्ण APAR स्वतः दर्शित होना।

ऑटो-फॉरवर्डिंग एवं अधिकार समाप्ति का विधिक नियम (Auto-Forwarding Clause): यदि कोई कर्मचारी अथवा अधिकारी विहित अंतिम तिथि तक अपना कार्य निष्पादित नहीं करता है, तो राज-काज सॉफ्टवेयर द्वारा प्रतिवेदन स्वतः अगले स्तर को अग्रेषित (Auto-Forwarded Without Comments) कर दिया जाता है। यदि कर्मचारी 30 जून तक स्व-मूल्यांकन प्रस्तुत नहीं करता, तो प्रतिवेदक अधिकारी बिना स्व-मूल्यांकन के सीधे अपना प्रतिवेदन दर्ज करने हेतु अधिकृत हो जाता है।

5. प्रतिकूल प्रविष्टि एवं श्रेणी में गिरावट: विधिक अधिकार एवं विलोपन प्रक्रिया (Adverse Entries & Expunction)

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार APAR में दर्ज किसी भी ऐसी प्रविष्टि को 'प्रतिकूल' माना जाता है जो कर्मचारी के कॅरियर, पदोन्नति अथवा प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाती हो:

A. प्रतिकूल प्रविष्टि की विधिक परिभाषा (What Constitutes an Adverse Entry):

  • सत्यनिष्ठा कॉलम में प्रतिकूल टिप्पणी अथवा संदेहास्पद सत्यनिष्ठा का अंकन।
  • कार्य निष्पादन या व्यक्तिगत गुणों के संबंध में नकारात्मक विशिष्ट टिप्पणियां (उदा. कर्तव्य के प्रति लापरवाह, जनसंपर्क असंतोषजनक, आदेशों की अवज्ञा)।
  • बेंचमार्क से कम ग्रेडिंग (Downgraded Grading): यदि संवर्ग में पदोन्नति हेतु बेंचमार्क 'Very Good' (अति उत्तम) निर्धारित है और कर्मचारी को बिना ठोस कारण 'Good' (अच्छा) या 'Average' (औसत) आंका गया है, तो सर्वोच्च न्यायालय के Abhijit Ghosh Dastidar vs. UOI (2009) निर्णय के अनुसार यह गिरावट भी विधिक दृष्टि से प्रतिकूल (Adverse) मानी जाती है और इसकी संसूचना देना अनिवार्य है।

B. संसूचना एवं अभ्यावेदन का विधिक अधिकार (Right to Represent):

  • स्वीकारकर्ता प्राधिकारी द्वारा APAR अनुमोदित होते ही कर्मचारी को राज-काज पर संपूर्ण प्रतिवेदन मय संख्यात्मक अंकों के संसूचित होता है।
  • कर्मचारी को संसूचना प्राप्ति की तिथि से 30 दिवस के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि अथवा डाउनग्रेडेड अंकों के विलोपन (Expunction of Adverse Remarks) हेतु सक्षम समीक्षा/अपील प्राधिकारी को लिखित अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

C. प्रतिकूल प्रविष्टि विलोपन की प्रशासनिक प्रक्रिया (Expunction Workflow):

  1. कर्मचारी राज-काज पोर्टल पर 'Representation on APAR' मॉड्यूल के माध्यम से अपना विस्तृत, तर्कसंगत एवं साक्ष्य-युक्त अभ्यावेदन प्रस्तुत करता है।
  2. सक्षम प्राधिकारी द्वारा संबंधित प्रतिवेदक एवं समीक्षक अधिकारी से उन प्रतिकूल टिप्पणियों के आधारभूत दस्तावेजों एवं औचित्य पर तथ्यात्मक आख्या (Factual Report) मांगी जाती है।
  3. यदि प्रतिवेदक अधिकारी प्रतिकूल टिप्पणी के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य (जैसे पूर्व में दिया गया कोई चेतावनी पत्र, कारण बताओ नोटिस या जांच) प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक तर्कसंगत आदेश (Speaking Order) पारित कर प्रतिकूल प्रविष्टि को विलोपित (Expunge) कर दिया जाता है अथवा ग्रेडिंग को अपग्रेड कर दिया जाता है।
  4. विलोपन आदेश की प्रति राज-काज में डिजिटल रूप से संलग्न की जाती है और सेवा पुस्तिका में इसकी प्रविष्टि की जाती है।

6. पदोन्नति डीपीसी में APAR का मूल्यांकन एवं बेंचमार्क नियम (Impact on DPC)

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अथवा विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) द्वारा पदोन्नति हेतु विचारणीय क्षेत्र (Zone of Consideration) में आने वाले कार्मिकों के विगत 5 से 7 वित्तीय वर्षों की APAR का गहन परीक्षण किया जाता है:

संख्यात्मक अंक स्लैब (Score 1-10) राज-काज श्रेणी (Grading Category) पदोन्नति (DPC) हेतु सामान्य विधिक प्रभाव
8.1 से 10.0 अंक उत्कृष्ट (Outstanding) मेरिट कोटा (Merit Quota) एवं त्वरित पदोन्नति हेतु सर्वोच्च प्राथमिकता।
6.1 से 8.0 अंक अति उत्तम (Very Good) अधिकांश राज्य सेवा एवं अधीनस्थ संवर्गों में पदोन्नति हेतु निर्धारित मानक बेंचमार्क।
4.1 से 6.0 अंक अच्छा (Good) वरिष्ठता-सह-योग्यता (Seniority-cum-Merit) कोटे में मान्य; विशुद्ध योग्यता कोटे में बाधा बन सकता है।
4.0 अथवा उससे कम अंक संतोषजनक / औसत (Average / Adverse) प्रतिकूल माना जाता है; पदोन्नति हेतु अयोग्य ठहराया जा सकता है (Unfit for Promotion)।

7. संस्था प्रधान, DDO एवं स्थापना शाखा हेतु APAR ऑडिट चेकलिस्ट (DDO Checklist)

डीपीसी पत्रावली तैयार करते समय एवं राज-काज पर APAR मॉनिटरिंग के दौरान नोडल अधिकारी/DDO को निम्नलिखित बिंदुओं की अनिवार्य विधिक जांच करनी चाहिए:

  • ☑ क्या कार्यालय के प्रत्येक सेवारत कर्मचारी द्वारा निर्धारित समय-सीमा (30 जून) के भीतर राज-काज पर स्व-मूल्यांकन सबमिट कर दिया गया है?
  • ☑ क्या यह सुनिश्चित कर लिया गया है कि प्रतिवेदक अधिकारी ने संबंधित कर्मचारी का न्यूनतम 90 दिन (3 माह) तक वास्तविक पर्यवेक्षण किया था?
  • ☑ यदि वित्तीय वर्ष में पदस्थापन में परिवर्तन हुआ था, तो क्या सभी अवधियों की पृथक-पृथक APAR अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी 'No Report Certificate' (NRC) संलग्न है?
  • ☑ क्या सत्यनिष्ठा (Integrity) कॉलम में स्पष्ट रूप से "प्रमाणित की जाती है" (Certified) अंकित है, अथवा किसी संदेह की स्थिति में तत्संबंधी जांच का विवरण संलग्न है?
  • ☑ यदि कर्मचारी को कोई प्रतिकूल प्रविष्टि अथवा बेंचमार्क से कम ग्रेडिंग दी गई थी, तो क्या उसे लिखित में संसूचित कर 30 दिवस की अभ्यावेदन अवधि का पालन कराया गया?
  • ☑ क्या डीपीसी के विचारार्थ भेजे जाने वाले APAR डोजियर में विगत 5 से 7 वर्षों के सभी वर्षों की स्वीकारकर्ता प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित अंतिम रिपोर्ट पूर्ण एवं अद्यतन है?

अस्वीकरण (Disclaimer): यह मार्गदर्शिका कार्मिक विभाग (DoP), राजस्थान सरकार द्वारा जारी विभिन्न परिपत्रों, राज-काज APAR कार्यविधि नियमों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक सिद्धांतों का एक विधिक व प्रशासनिक सार-संक्षेप है। किसी भी आधिकारिक निर्णय, विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) अथवा विधिक अभ्यावेदन के संदर्भ में कार्मिक विभाग के मूल परिपत्रों (dop.rajasthan.gov.in) एवं न्यायालय के अधिकृत निर्णयों को ही वैधानिक आधार माना जाए।

Advertisement