Rajasthan State Insurance (SI) New Slabs 2026: नए नियम और प्रीमियम
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Rajasthan State Insurance (SI) New Slabs & Rules 2026: राज्य बीमा प्रीमियम स्लैब, दो स्टेप आगे कटौती, लोन एवं SIPF नियम
राजस्थान सरकार के अधीन नियमित रूप से नियुक्त प्रत्येक स्थायी/स्थायीकृत राज्य कर्मचारी के सामाजिक एवं वित्तीय संरक्षण हेतु राज्य बीमा (State Insurance - SI) योजना एक अनिवार्य एवं सर्वाधिक लाभकारी जीवन बीमा व बचत प्रावधान है।
कर्मचारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों (DDO) के मध्य अक्सर यह संशय रहता है कि राज्य बीमा की कटौती पहली बार कब शुरू होती है, कर्मचारी अपनी बेसिक पे के अनुसार अधिकतम कितनी कटौती करवा सकता है, दो स्टेप आगे (Step-Up Slabs) का चयन कैसे किया जाता है, 55 वर्ष की आयु के बाद क्या कटौती बढ़ाई जा सकती है, तथा SIPF पोर्टल पर प्रथम घोषणा पत्र (First Declaration) और अधिक घोषणा पत्र (Further Declaration) सबमिट करने की प्रक्रिया क्या है।
यह संदर्भ मार्गदर्शिका राजस्थान राज्य बीमा नियम, 1998, वित्त विभाग (राजस्व प्रभाग) की अधिसूचनाओं और राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग (SIPF) के नवीनतम परिपत्रों के अनुसार SI प्रीमियम स्लैब, जोखिम वहन तिथि (Date of Risk), लोन पात्रता और DDO सत्यापन प्रक्रिया का संपूर्ण विधिक व वित्तीय विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
1. विधिक आधार एवं मूल ढांचा (Statutory Framework)
- राजस्थान राज्य बीमा नियम, 1998: राज्य सेवा के समस्त नियमित कर्मचारियों के लिए राज्य बीमा पॉलिसी अनिवार्य रूप से लागू होती है।
- बजट शीर्ष (Budget Head): SI प्रीमियम की मासिक कटौती राज्य के लोक लेखा बजट शीर्ष
8011-00-105-01में जमा की जाती है। - जोखिम वहन तिथि (Date of Risk - DOR): राज्य बीमा योजना में प्रथम कटौती अथवा कटौती में वृद्धि का प्रभावी प्रभाव हमेशा 1 अप्रैल से माना जाता है (जिसकी कटौती मार्च माह के वेतन से की जाती है, जो अप्रैल में देय होता है - "मार्च देय अप्रैल")।
- प्रोबेशनर-ट्रेनी (Probationer-Trainee) की स्थिति:
- 2 वर्ष के प्रोबेशन प्रशिक्षण काल के दौरान राज्य बीमा (SI) की कोई कटौती नहीं की जाती है।
- प्रोबेशन पूर्ण होने और पद पर स्थायीकरण (Confirmation) होने के पश्चात आने वाले आगामी मार्च माह के वेतन (देय अप्रैल) से पहली बार SI कटौती प्रारंभ होती है।
2. 7वें वेतन आयोग अनुसार राज्य बीमा (SI) मासिक प्रीमियम स्लैब तालिका
वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांक F. 13(21)FD/Revenue/76-Part के अनुसार 7वें वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स मूल वेतन (Basic Pay) के आधार पर निर्धारित अनिवार्य एवं वैकल्पिक स्लैब निम्नानुसार हैं:
| क्र. सं. | पे-मैट्रिक्स मूल वेतन स्लैब (Basic Pay in Pay Matrix) | न्यूनतम अनिवार्य प्रीमियम (Rs.) | प्रथम वैकल्पिक स्लैब (+1 Step) | द्वितीय वैकल्पिक स्लैब (+2 Steps / Max) |
| 1 | ₹ 22,000/- तक | ₹ 800/- | ₹ 1,200/- | ₹ 2,200/- |
| 2 | ₹ 22,001/- से ₹ 28,500/- तक | ₹ 1,200/- | ₹ 2,200/- | ₹ 3,000/- |
| 3 | ₹ 28,501/- से ₹ 46,500/- तक | ₹ 2,200/- | ₹ 3,000/- | ₹ 5,000/- |
| 4 | ₹ 46,501/- से ₹ 72,000/- तक | ₹ 3,000/- | ₹ 5,000/- | ₹ 7,000/- |
| 5 | ₹ 72,001/- एवं उससे अधिक | ₹ 5,000/- | ₹ 7,000/- | ₹ 7,000/- (अधिकतम सीमा) |
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अधिकतम कटौती सीमा (Ceiling): राज्य सरकार द्वारा राज्य बीमा के अंतर्गत किसी भी कर्मचारी के लिए अधिकतम मासिक प्रीमियम कटौती की सीमा ₹ 7,000/- प्रति माह निर्धारित है।
3. दो स्लैब आगे (Step-Up) कटौती का स्वैच्छिक अधिकार
राजस्थान राज्य बीमा नियमों के तहत प्रत्येक कर्मचारी को अपनी बचत बढ़ाने और अधिक बीमा संरक्षण प्राप्त करने हेतु यह विशेष विधिक अधिकार दिया गया है:
- स्वेच्छा से वृद्धि: कर्मचारी अपने मूल वेतन के अनुसार निर्धारित "न्यूनतम अनिवार्य स्लैब" के स्थान पर अपनी इच्छा से एक स्टेप आगे (+1 Step) अथवा दो स्टेप आगे (+2 Steps) की प्रीमियम राशि का चयन कर सकता है।
- बोनस का दोहरा लाभ: चूंकि राज्य सरकार द्वारा बीमाधन पर आकर्षक वार्षिक बोनस (सामान्यतः ₹ 85 से ₹ 90 प्रति हजार बीमाधन) घोषित किया जाता है, अतः उच्च स्लैब का चयन करने से कर्मचारी का कुल बीमाधन (Sum Assured) और मैच्योरिटी फंड काफी बढ़ जाता है।
- आयकर लाभ (Section 80C): SI में जमा संपूर्ण मासिक प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कुल ₹ 1.50 लाख तक की कर-कटौती (Tax Exemption) हेतु पूर्णतः मान्य है।
4. 55 वर्ष की आयु सीमा का विधिक प्रतिबंध (55-Year Age Rule)
राज्य बीमा नियमों के अनुसार प्रीमियम कटौती में वृद्धि करने की एक सख्त विधिक आयु-सीमा निर्धारित है:
- 55 वर्ष का प्रतिबंध: यदि किसी कर्मचारी की आयु आगामी 1 अप्रैल को 55 वर्ष या उससे अधिक हो जाती है, तो वह अपने राज्य बीमा प्रीमियम में कोई ऐच्छिक वृद्धि (Step-up) नहीं करवा सकता।
- प्रीमियम स्थिर होना: 55 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद कर्मचारी का मासिक प्रीमियम उसी दर पर स्थिर (Freeze) हो जाता है जो वह 55 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पूर्व के वित्तीय वर्ष में कटवा रहा था।
- वेतन वृद्धि / पदोन्नति का प्रभाव: 55 वर्ष की आयु के बाद पदोन्नति या इंक्रीमेंट से बेसिक पे अगले स्लैब में जाने पर भी अनिवार्य रूप से प्रीमियम बढ़ाने की बाध्यता नहीं रहती।
5. प्रथम घोषणा पत्र (First Declaration) बनाम अधिक घोषणा पत्र (Further Declaration)
कटौती को ऑनलाइन दर्ज और सत्यापित कराने के लिए SIPF न्यू पोर्टल (SSO ID) पर दो प्रकार के घोषणा पत्र भरे जाते हैं:
| प्रपत्र का प्रकार | कब भरा जाता है? | किसके लिए लागू? | आवश्यक प्रक्रिया |
| प्रथम घोषणा पत्र (First Declaration) | जब सेवा में पहली बार SI कटौती शुरू की जा रही हो (प्रोबेशन पूर्ण होने के बाद आगामी मार्च में)। | नवनियुक्त / स्थायीकृत कर्मचारी। | SSO ID पर SIPF पोर्टल लॉगिन → 'SI First Declaration' मॉड्यूल → बेसिक पे व नॉमिनी विवरण भरना → ई-साइन (Aadhaar OTP) → DDO अनुमोदन। |
| अधिक घोषणा पत्र (Further Declaration) | जब कर्मचारी की बेसिक पे बढ़ने पर अथवा स्वैच्छिक रूप से प्रीमियम दर में वृद्धि की जा रही हो। | पूर्व से बीमित नियमित कर्मचारी। | SSO ID पर SIPF पोर्टल लॉगिन → 'SI Further Declaration' मॉड्यूल → नवीन प्रीमियम स्लैब चयन → ई-साइन → DDO अनुमोदन। |
6. राज्य बीमा ऋण (SI Loan) एवं ब्याज दर नियम
कर्मचारी आपातकालीन वित्तीय आवश्यकताओं के लिए अपनी जमा राज्य बीमा पॉलिसी पर ऋण (Loan) प्राप्त कर सकता है:
- पात्रता एवं ऋण सीमा: पॉलिसी के समर्पण मूल्य (Surrender Value) तथा उस पर अर्जित कुल संचित बोनस के 90% तक की राशि ऋण के रूप में स्वीकृत की जा सकती है।
- पुनर्भुगतान (Repayment Schedule):
- मूल ऋण राशि की वसूली अधिकतम 60 समान मासिक किस्तों में वेतन बिल से की जाती है।
- ब्याज दर (Rate of Interest):
- मूल ऋण राशि पूरी तरह चुकता हो जाने के बाद उस पर 8.5% साधारण ब्याज (Simple Interest) की गणना की जाती है।
- ब्याज की यह राशि आगामी 10 समान मासिक किस्तों में वेतन से काटी जाती है।
- द्वितीय ऋण की शर्त: पूर्व में लिए गए एसआई लोन के पूर्ण चुकता होने और उसके न्यूनतम 2 वर्ष व्यतीत होने से पूर्व नया ऋण स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
7. परिपक्वता दावा (Maturity) एवं असामयिक मृत्यु परिलाभ (Death Claim)
- बीमा परिपक्वता (Maturity at Retirement):
- कर्मचारी की अधिवार्षिकी आयु (60 वर्ष) पूर्ण होने के उपरांत आने वाले अगले 1 अप्रैल को बीमा पॉलिसी परिपक्व (Mature) हो जाती है।
- परिपक्वता पर कुल बीमाधन (Sum Assured) + संपूर्ण सेवाकाल का वार्षिक संचित बोनस + अतिरिक्त टर्मिनल बोनस का एकमुश्त भुगतान कर्मचारी के बैंक खाते में किया जाता है।
- सेवानिवृत्ति से पूर्व असामयिक मृत्यु (Death in Service):
- यदि बीमित कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान आकस्मिक मृत्यु हो जाती है, तो राज्य सरकार द्वारा आश्रित नामांकित व्यक्ति (Nominee) को बीमाधन की दुगुनी राशि (Double the Sum Assured) तथा उस तिथि तक संचित बोनस का एकमुश्त भुगतान किया जाता है (चाहे मृत्यु प्रथम प्रीमियम जमा होने के ठीक बाद ही क्यों न हुई हो)।
8. DDO एवं आहरण संवितरण अधिकारी हेतु ऑडिट चेकलिस्ट (DDO Inspection Checklist)
मार्च माह के वेतन बिल (देय अप्रैल) तैयार करते समय DDO को निम्नलिखित विधिक जांच अवश्य करनी चाहिए:
- क्या नवनियुक्त स्थायीकृत कार्मिकों से ऑनलाइन प्रथम घोषणा पत्र (First Declaration) भरवाकर SIPF जिला कार्यालय से बीमा पॉलिसी नंबर जारी करवा लिया गया है?
- जिन कर्मचारियों ने स्वेच्छा से दो स्टेप आगे (+2 Steps) का चयन किया है, क्या उनका अधिक घोषणा पत्र (Further Declaration) ई-साइन होकर DDO लॉगिन पर सत्यापित हो चुका है?
- क्या यह सुनिश्चित किया गया है कि 1 अप्रैल को 55 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों के प्रीमियम में कोई अनधिकृत वृद्धि तो नहीं की गई?
- क्या किसी भी कर्मचारी का कुल मासिक SI प्रीमियम ₹ 7,000/- की अधिकतम विधिक सीमा को पार तो नहीं कर रहा?
- क्या प्रोबेशनर-ट्रेनी के वेतन से प्रोबेशन काल के दौरान किसी भी परिस्थिति में SI की कटौती नहीं की जा रही है?
- सेवानिवृत्ति से पूर्व क्या कार्मिक के एसआई पासबुक का SIPF पोर्टल पर लेजर मिलान (Ledger Verification) पूर्ण कर लिया गया है?
अस्वीकरण (Disclaimer): यह मार्गदर्शिका राजस्थान राज्य बीमा नियम, 1998 तथा वित्त विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं का एक विधिक व प्रशासनिक सार-संक्षेप है। किसी भी आधिकारिक वित्तीय आहरण, प्रीमियम निर्धारण अथवा क्लेम विवाद की स्थिति में वित्त विभाग एवं SIPF निदेशालय के मूल नियमों (sipf.rajasthan.gov.in / finance.rajasthan.gov.in) को ही वैधानिक आधार माना जाए।