राजस्थान NPS नियम 2026: टैक्स लाभ और निकासी के नए नियम

Jan 28, 2026
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Table of Contents

Rajasthan NPS Guide & Rules: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, OPS बहाली के बाद PRAN कॉर्पस की स्थिति, PFRDA विधिक प्रावधान एवं DDO दिशा-निर्देश

राजस्थान सरकार के अंतर्गत 01.01.2004 को अथवा उसके पश्चात नियुक्त राज्य कर्मचारियों के लिए संचालित की गई राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (National Pension System - NPS) राज्य के सेवा नियमों और पेंशन इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। 1 अप्रैल 2022 से पुरानी पेंशन योजना (OPS) की ऐतिहासिक बहाली के उपरांत राज्य सरकार के कार्मिकों हेतु एनपीएस की विधिक स्थिति, वेतन कटौती और पूर्व में जमा अंशदान के निस्तारण को लेकर व्यापक प्रशासनिक परिवर्तन हुए हैं।

प्रायः सेवारत कार्मिकों, सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों (DDO) के मध्य यह संशय रहता है कि 01.01.2004 से 31.03.2022 के मध्य जमा किए गए 10% कर्मचारी अंशदान और 14% सरकारी अंशदान का क्या होगा, PFRDA और राज्य सरकार के मध्य संचित कॉर्पस (Accumulated Corpus) को लेकर क्या विधिक व्यवस्था है, यदि किसी कर्मचारी ने पूर्व में एनपीएस से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) कर ली थी तो उसका समायोजन कैसे होगा, तथा स्वायत्तशासी निकायों (Boards, Corporations, Universities) में एनपीएस के क्या नियम लागू हैं।

यह संदर्भ मार्गदर्शिका पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013, वित्त विभाग (नियम एवं पेंशन प्रभाग), राजस्थान सरकार की अधिसूचना क्रमांक F. 19(3)FD/Pen/2021 दिनांक 19.05.2022 तथा तत्संबंधी दिशा-निर्देशों के आधार पर एनपीएस की विधिक यात्रा, कॉर्पस समायोजन, और DDO सत्यापन प्रक्रिया का संपूर्ण प्रशासनिक व विधिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।


1. राजस्थान में NPS का ऐतिहासिक ढांचा एवं विधिक आधार (Statutory Background)

  • लागू होने की तिथि: राजस्थान सरकार द्वारा 01.01.2004 को या उसके पश्चात कार्यभार ग्रहण करने वाले समस्त नियमित राज्य कर्मचारियों हेतु राजस्थान सेवा नियम (RSR), 1951 के नियम 56 एवं पेंशन नियमों में संशोधन कर अंशदायी पेंशन योजना (NPS) अनिवार्य की गई थी।
  • नियामक प्राधिकरण (Regulator): योजना का संचालन संसद द्वारा पारित PFRDA अधिनियम, 2013 तथा केंद्रीय रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी (CRA - Protean / KFintech) के माध्यम से स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) जारी कर किया गया।
  • अंशदान संरचना (Contribution Ratio):
    • प्रारंभ में: कर्मचारी का 10% मूल वेतन + DA तथा राज्य सरकार का 10% अंशदान।
    • 01.04.2019 से संशोधित: कर्मचारी का 10% तथा राज्य सरकार का 14% मासिक अंशदान।
  • बजट शीर्ष (Budget Head): सरकारी नियोक्ता अंशदान का व्यय राज्य सरकार के बजट शीर्ष 2071-01-117 (सरकारी कर्मचारियों के लिए अंशदायी पेंशन योजना) के अंतर्गत वहन किया जाता था।

2. OPS बहाली के पश्चात NPS वेतन कटौती की विधिक स्थिति (Post-OPS Stoppage)

वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 19.05.2022 तथा संबंधित आदेशों के अनुसरण में राज्य सेवा के कार्मिकों हेतु वेतन प्रणाली में निम्नलिखित तात्कालिक परिवर्तन किए गए:

मद (Head) 01.04.2022 से पूर्व की स्थिति (NPS Regime) 01.04.2022 के पश्चात की स्थिति (OPS Regime)
कर्मचारी वेतन से मासिक कटौती मूल वेतन + महंगाई भत्ते (Basic + DA) का 10% अनिवार्य कटौती। पूर्णतः समाप्त (Nil): NPS कटौती बंद कर GPF-2004 के तहत स्लैब अनुसार कटौती शुरू।
राज्य सरकार का अंशदान (14%) प्रतिमाह राजकोष से कर्मचारी के PRAN खाते में 14% जमा। पूर्णतः बंद: राजकोष से अंशदान का अंतरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।
PRAN खाते की स्थिति सक्रिय (Active Transaction State)। स्थिर / गैर-अंशदायी (Dormant for State Contribution)।
पेंशन निर्धारण का आधार 60% एकमुश्त नकद + 40% की वार्षिकी (Annuity)। अंतिम मूल वेतन का 50% गारंटीकृत पेंशन (पेंशन नियम 1996)।

3. PFRDA के पास संचित NPS कॉर्पस एवं विधिक विवाद (The Corpus Dispute)

राजस्थान सरकार द्वारा 01.01.2004 के बाद नियुक्त कार्मिकों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में शामिल करने के उपरांत संचित फंड के संबंध में केंद्र-राज्य विधिक स्थिति निम्नानुसार है:

  • राज्य सरकार की मांग: राजस्थान सरकार द्वारा PFRDA एवं केंद्र सरकार से आधिकारिक अनुरोध किया गया कि राज्य कर्मचारियों एवं सरकार द्वारा जमा कराया गया कुल संचित कॉर्पस (लगभग ₹ 39,000 करोड़ से अधिक) राज्य सरकार को वापस लौटाया जाए ताकि इसे कर्मचारियों के GPF-2004 खाते में समायोजित किया जा सके।
  • PFRDA का विधिक पक्ष: PFRDA अधिनियम, 2013 एवं निकास विनियमों (Exit Regulations) के तहत प्राधिकरण ने यह स्पष्ट किया कि संचित कॉर्पस पर केवल व्यक्तिगत ग्राहक (Subscriber/Employee) का विधिक अधिकार है; अधिनियम में संपूर्ण संचित राशि को किसी राज्य सरकार के राजकोष में एकमुश्त वापस करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

4. सेवानिवृत्ति पर NPS कॉर्पस का समायोजन एवं सरकारी नियम (Retirement Settlement)

वर्तमान में जो कर्मचारी 01.01.2004 के बाद नियुक्त हुए थे और अब सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनके लिए वित्त विभाग ने स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

समायोजन का विधिक नियम: चूंकि कर्मचारी को राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के तहत 100% गारंटीकृत पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी (DCRG), और 300 दिन के उपार्जित अवकाश (PL) नकदीकरण का पूर्ण लाभ दिया जा रहा है, अतः NPS के अंतर्गत जमा सरकारी अंशदान और उस पर अर्जित लाभांश पर कर्मचारी दोहरा दावा नहीं कर सकता।

  1. सरकारी अंशदान की राजकोष में वापसी: सेवानिवृत्ति के समय PFRDA से आहरित की जाने वाली कुल राशि में से राज्य सरकार द्वारा जमा कराए गए अंशदान (Employer Share) एवं उस पर अर्जित रिटर्न को राज्य सरकार के राजकोष (Budget Head 0071) में ई-ग्रास (e-GRAS) चालान के माध्यम से जमा कराना होता है।
  2. कर्मचारी का स्वयं का अंशदान: कर्मचारी द्वारा 01.01.2004 से 31.03.2022 तक स्वयं के वेतन से कटवाई गई 10% राशि (Employee Share) और उस पर अर्जित ब्याज को उसके GPF-2004 खाते में अंतरित/समायोजित माना जाता है।
  3. पूर्व आंशिक निकासी (Prior Partial Withdrawal) का नियम: यदि किसी कार्मिक ने सेवाकाल के दौरान मकान निर्माण, बीमारी अथवा विवाह हेतु NPS से 25% तक की आंशिक निकासी की थी, तो उस राशि के समायोजन हेतु वित्त विभाग के निर्धारित परिपत्रों के अनुसार रिकवरी/एडजस्टमेंट का विकल्प पत्र लिया जाता है।

5. स्वायत्तशासी संस्थाओं एवं बोर्ड/निगमों में NPS की स्थिति (PSUs & Autonomous Bodies)

  • वित्तीय रूप से सक्षम निकाय: राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण/वितरण निगम (डिस्कॉम), रीको (RIICO), हाउसिंग बोर्ड तथा राज्य कृषि विपणन बोर्ड जैसी स्वायत्त संस्थाओं ने अपने निदेशक मंडल (Board of Directors) से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार की तर्ज पर अपने कार्मिकों हेतु OPS लागू किया है।
  • स्व-वित्तपोषित एवं विश्वविद्यालय: ऐसे विश्वविद्यालय और निकाय जिनका अपना पृथक पेंशन कोष (Pension Corpus) है, उन्हें अपने आंतरिक वित्तीय संसाधनों से पेंशन देनदारियों का वहन करना होता है; जिन संस्थाओं ने अभी तक OPS अधिसूचना अंगीकार नहीं की है, वहाँ NPS व्यवस्था ही निरंतर जारी है।

6. DDO एवं आहरण संवितरण अधिकारी हेतु ऑडिट चेकलिस्ट (DDO Checklist)

एनपीएस से आच्छादित रहे पूर्व कर्मचारियों के वेतन एवं सेवानिवृत्ति पत्रावली का निस्तारण करते समय DDO को निम्नलिखित जांच अवश्य करनी चाहिए:

  • ☑ क्या 1 अप्रैल 2022 के उपरांत पे-मैनेजर / IFMS 3.0 पर कर्मचारी के वेतन बिल से 10% NPS कटौती पूर्णतः बंद है और केवल GPF-2004 स्लैब काटा जा रहा है?
  • ☑ क्या कार्मिक के PRAN नंबर और सर्विस बुक के प्रथम पृष्ठ पर दर्ज एनपीएस पासबुक रिकॉर्ड का संधारण सुरक्षित है?
  • ☑ सेवानिवृत्ति प्रकरणों में क्या कर्मचारी से इस आशय का विधिक वचनबद्धता पत्र (Undertaking) प्राप्त कर लिया गया है कि वह राज्य पेंशन नियमों के तहत पेंशन परिलाभ प्राप्त करने के बदले एनपीएस कॉर्पस के सरकारी अंशदान का समर्पण करेगा?
  • ☑ क्या कर्मचारी के GPF-2004 लेजर में 01.04.2022 से अब तक की कटौतियों का SIPF पोर्टल पर पूर्ण मिलान हो चुका है?
  • ☑ क्या कार्मिक द्वारा सेवाकाल में ली गई किसी पूर्व एनपीएस आंशिक निकासी का विवरण पेंशन आवेदन पत्र (Form-7) के साथ संलग्न किया गया है?

अस्वीकरण (Disclaimer): यह मार्गदर्शिका पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013, वित्त विभाग (नियम एवं पेंशन प्रभाग), राजस्थान सरकार द्वारा समय-समय पर जारी परिपत्रों तथा राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 का एक विधिक व प्रशासनिक सार-संक्षेप है। किसी भी आधिकारिक पेंशन निर्धारण, विवाद अथवा न्यायिक दावे के संदर्भ में वित्त विभाग एवं पेंशन निदेशालय के मूल नियमों (pension.rajasthan.gov.in / finance.rajasthan.gov.in) को ही वैधानिक आधार माना जाए।

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