राजस्थान प्रोबेशनर अनपेड लीव रूल्स: EOL और प्रोबेशन एक्सटेंशन
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Probationer Trainee Extraordinary Leave (EOL) Rules in Rajasthan: प्रोबेशन में अवैतनिक असाधारण अवकाश, 30 दिन की सीमा एवं स्थायीकरण पर प्रभाव
राजस्थान सरकार के अंतर्गत सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थियों (Probationer-Trainees) के लिए अवकाश नियम नियमित स्थाई कर्मचारियों की तुलना में अत्यंत कड़े होते हैं। प्रोबेशन काल के दौरान कर्मचारियों को केवल आकस्मिक अवकाश (Casual Leave - 15 दिन) की पात्रता होती है; उपार्जित अवकाश (PL) या अर्धवेतन अवकाश (HPL) की पात्रता नहीं होती।
ऐसी स्थिति में यदि किसी प्रोबेशनर कार्मिक को गंभीर बीमारी, प्रसूति संबंधी जटिलता या उच्च अध्ययन (Higher Education / Regular Course) के कारण लंबी अनुपस्थिति की आवश्यकता पड़ती है, तो उसे अवैतनिक असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave Without Pay - EOL) स्वीकृत कराना होता है।
यह संदर्भ मार्गदर्शिका राजस्थान सेवा नियम (RSR), 1951 के नियम 96, वित्त विभाग (नियम प्रभाग) की अधिसूचनाओं और कार्मिक विभाग (DoP) के परिपत्रों के अनुसार प्रोबेशन में EOL के नियम, 30 दिन की विधिक छूट, प्रोबेशन अवधि के आगे खिसकने (Extension of Probation) तथा वेतन निर्धारण पर पड़ने वाले प्रभावों का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
1. विधिक आधार एवं EOL का स्वरूप (Statutory Framework)
- RSR नियम 96 — असाधारण अवकाश (EOL): असाधारण अवकाश एक ऐसा अवकाश है जिसमें कर्मचारी को कोई अवकाश वेतन (No Leave Salary / No Pay) देय नहीं होता है।
- प्रोबेशनर-ट्रेनी के संदर्भ में प्रयोज्यता: वित्त विभाग की अधिसूचना संख्या F. 1(2)FD/Rules/2006 दिनांक 20.01.2006 के अनुसार, प्रोबेशनर-ट्रेनी को 15 दिन के आकस्मिक अवकाश के अलावा किसी अन्य नियमित सवेतन अवकाश का अधिकार नहीं है। अतः आकस्मिक अवकाश समाप्त होने के बाद किसी भी अनिवार्य अनुपस्थिति को केवल असाधारण अवकाश (EOL Without Pay) के रूप में ही नियमित किया जा सकता है।
- अधिकार के रूप में दावा नहीं: RSR नियम 59 के तहत अवकाश की मांग अधिकार (Right) के रूप में नहीं की जा सकती। EOL की स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी के विवेक और प्रशासनिक आवश्यकता पर निर्भर करती है।
2. 30 दिवस की सीमा और प्रोबेशन विस्तार का नियम (The 30-Day Rule)
वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरणों के अनुसार प्रोबेशनर-ट्रेनी द्वारा लिए गए असाधारण अवकाश (EOL) को दो श्रेणियों में परखा जाता है:
| EOL की अवधि (Duration of EOL) | स्थायीकरण (Confirmation) पर प्रभाव | प्रोबेशन अवधि विस्तार (Extension) | वेतन वृद्धि (Increment) पर प्रभाव |
| 30 दिन तक (Up to 30 Days) | कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं | प्रोबेशन अवधि आगे नहीं बढ़ती। निर्धारित 2 वर्ष पूर्ण होने पर ही स्थायीकरण माना जाता है। | आगामी 1 जुलाई को नियमित इंक्रीमेंट देय (यदि 6 माह की अर्हक सेवा पूर्ण हो)। |
| 30 दिन से अधिक (More than 30 Days) | प्रोबेशन आगे बढ़ेगा | 30 दिन से जितनी अवधि अधिक होगी (अथवा पूरे EOL काल के बराबर, आदेशानुसार), प्रोबेशन काल उतने ही दिनों के लिए आगे खिसक जाएगा। | स्थायीकरण आगे खिसकने से पहली वार्षिक वेतन वृद्धि (1 जुलाई) प्रभावित या विलंबित हो सकती है। |
व्यावहारिक गणना उदाहरण (Practical Scenario):
- नियुक्ति तिथि: 01.10.2024
- सामान्य 2 वर्ष पूर्ण होने की तिथि: 30.09.2026
- केस A (20 दिन का मेडिकल EOL): चूंकि यह 30 दिन की सीमा के भीतर है, अतः प्रोबेशन 30.09.2026 को ही पूर्ण माना जाएगा और 01.10.2026 से नियमित पे-लेवल का लाभ मिलेगा।
- केस B (75 दिन का EOL): यहां कर्मचारी ने 30 दिन से अधिक EOL लिया है (अतिरिक्त अवधि = 45 दिन)। परिणामस्वरूप, कर्मचारी का प्रोबेशन 45 दिन आगे बढ़ जाएगा और स्थायीकरण 30.09.2026 के स्थान पर 14.11.2026 को प्रभावी होगा।
3. उच्च अध्ययन एवं डिग्री पूर्ण करने हेतु EOL (EOL for Higher Studies)
कई अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षा के चयन के समय बीएड (B.Ed), एमएड, पीजी (Post-Graduation), एमफिल या पीएचडी (Ph.D) के नियमित छात्र (Regular Student) होते हैं। उनके लिए सेवा नियम निम्नानुसार हैं:
- अध्ययन पूर्ण करने हेतु EOL की अनुमति: यदि विभाग जनहित और रिक्तियों की स्थिति को देखते हुए अनुमति देता है, तो प्रोबेशनर-ट्रेनी को अपना नियमित पाठ्यक्रम या परीक्षा पूर्ण करने हेतु अवैतनिक असाधारण अवकाश (EOL Without Pay) स्वीकृत किया जा सकता है।
- सक्षम स्वीकृति आवश्यक: उच्च अध्ययन हेतु EOL की स्वीकृति सामान्यतः कार्यालयाध्यक्ष (DDO) के स्तर से नहीं दी जा सकती; इसके लिए विभागाध्यक्ष (Head of Department - HoD) अथवा प्रशासनिक विभाग की मंजूरी अनिवार्य होती है।
- संपूर्ण प्रोबेशन का विस्तार: अध्ययन हेतु जितने माह या वर्ष का EOL लिया जाता है, प्रोबेशन अवधि पूर्णतः उतने ही समय के लिए आगे बढ़ जाती है। इस संपूर्ण अवधि के दौरान कोई नियत पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) देय नहीं होता।
4. चिकित्सकीय आधार पर EOL (Medical EOL)
- प्रक्रिया: यदि कोई प्रोबेशनर गंभीर बीमारी या दुर्घटना के कारण 15 दिन के आकस्मिक अवकाश समाप्त होने के बाद भी अनुपस्थित रहता है, तो उसे अधिकृत चिकित्सा अधिकारी (Medical Officer / CMHO) द्वारा जारी मेडिकल प्रमाण पत्र (Medical Certificate in prescribed form) प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
- आरोग्यता प्रमाण पत्र (Fitness Certificate): पुनः कार्यभार ग्रहण करते समय उसी चिकित्सा अधिकारी अथवा मेडिकल बोर्ड से जारी स्वस्थता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना विधिक रूप से आवश्यक है।
- महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की स्थिति: यदि महिला प्रोबेशनर-ट्रेनी 180 दिन का पूर्ण मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) लेती है, तो वह सवेतन अवकाश है और उससे प्रोबेशन आगे नहीं खिसकता। परंतु यदि मातृत्व अवकाश के तुरंत बाद अतिरिक्त बीमारी के आधार पर EOL लिया जाता है, तो उस पर EOL के नियम लागू होंगे।
5. अनाधिकृत अनुपस्थिति (Unauthorized Absence) के विधिक खतरे
यदि कोई प्रोबेशनर-ट्रेनी बिना पूर्व स्वीकृति या बिना वैध सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है:
- सेवा समाप्ति का जोखिम (Termination of Service): राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 और सेवा शर्तों के तहत प्रोबेशनर को संतोषजनक सेवा न होने पर बिना लंबी विभागीय जांच के केवल 1 माह का नोटिस देकर अथवा नोटिस वेतन देकर सेवा से पदमुक्त (Discharge / Terminate) किया जा सकता है।
- डाइज-नॉन (Dies-Non): अनाधिकृत अनुपस्थिति की अवधि को वित्त विभाग द्वारा Dies-Non (कार्य नहीं, वेतन नहीं) माना जा सकता है, जो सेवा में व्यवधान (Break in Service) उत्पन्न कर सकती है।
6. सक्षम प्राधिकारी एवं स्वीकृति प्रक्रिया (Approval Hierarchy)
[कर्मचारी द्वारा प्रार्थना पत्र + मेडिकल/स्टडी दस्तावेज DDO को प्रस्तुत करना] │ ▼ [30 दिन तक का चिकित्सकीय EOL: कार्यालयाध्यक्ष (Head of Office / DDO) स्तर पर निर्णय] │ ▼ [30 दिन से अधिक का EOL / उच्च अध्ययन EOL: विभागाध्यक्ष (Director/HOD) को प्रेषण] │ ▼ [सक्षम स्तर से औपचारिक EOL स्वीकृति आदेश जारी होना] │ ▼ [सेवा पुस्तिका (Service Book) के अवकाश पृष्ठ पर लाल स्याही में प्रविष्टि] │ ▼ [स्थायीकरण आदेश में प्रोबेशन विस्तार की संशोधित तिथि का स्पष्ट अंकन]
7. DDO एवं आहरण संवितरण अधिकारी हेतु ऑडिट चेकलिस्ट (DDO Inspection Checklist)
स्थायीकरण आदेश जारी करने से पूर्व DDO को निम्नलिखित विधिक बिंदुओं का परीक्षण करना चाहिए:
- क्या कर्मचारी के अवकाश खाते में उपस्थिति पंजिका के अनुसार 15 CL से अधिक की अनुपस्थिति है?
- 30 दिन से अधिक के EOL के मामले में क्या सक्षम प्राधिकारी (HoD/सरकार) का स्वीकृति आदेश संलग्न है?
- क्या मेडिकल EOL के सभी दावों में राजकीय चिकित्सा अधिकारी का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र व फिटनेस प्रमाण पत्र मौजूद है?
- प्रोबेशनर के स्थायीकरण आदेश में 30 दिन से अतिरिक्त EOL की अवधि को जोड़ते हुए संशोधित स्थायीकरण तिथि (Extended Confirmation Date) सही दर्ज की गई है?
- EOL अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के नियत पारिश्रमिक (Fixed Pay) का आहरण तो नहीं हुआ है (No Work, No Pay का सत्यापन)?
अस्वीकरण (Disclaimer): यह मार्गदर्शिका राजस्थान सेवा नियम (RSR), 1951 के नियम 96 तथा वित्त एवं कार्मिक विभाग द्वारा जारी परिपत्रों का एक शैक्षणिक व प्रशासनिक विश्लेषण है। किसी भी आधिकारिक निर्णय, अवकाश स्वीकृति अथवा न्यायालयी प्रकरण के संदर्भ में वित्त विभाग, राजस्थान सरकार के मूल नियमों एवं आधिकारिक परिपत्रों (finance.rajasthan.gov.in) को ही मान्य आधार माना जाए।