RGHS Big Update: क्या बीमा मॉडल पर चलेगा RGHS? जानें क्या होंगे बदलाव!

Apr 02, 2026
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RGHS Big Update: राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, अब बीमा मॉडल पर चलेगी RGHS योजना; जानें क्या बदलेगा?

RGHS Insurance Model Update: राजस्थान के करीब 14 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में एक क्रांतिकारी बदलाव करने की तैयारी में है। अब इस योजना को सीधे अस्पतालों से जोड़कर चलाने के बजाय 'बीमा (Insurance) मॉडल' पर ले जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नया मॉडल क्या है और इससे कर्मचारियों व पेंशनर्स की सेहत पर क्या असर पड़ेगा।

क्या है वर्तमान व्यवस्था और क्यों पड़ा बदलाव की जरूरत?

वर्तमान में RGHS योजना के तहत सरकार सीधे अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को भुगतान (Payment) करती है। कर्मचारियों को कैशलेस इलाज मिलता है। लेकिन पिछले काफी समय से अस्पतालों को भुगतान में होने वाली देरी (8 से 9 महीने का बैकलाग) एक बड़ी समस्या बन गई है। निजी अस्पतालों का करोड़ों रुपया बकाया होने के कारण कई बार मरीजों को कैशलेस इलाज मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार अब इसे इंश्योरेंस मॉडल पर लाने जा रही है।

बीमा मॉडल से क्या होंगे फायदे? (सरकार का तर्क)

सरकार का मानना है कि बीमा कंपनी के बीच में आने से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी:

  1. समय पर भुगतान: बीमा कंपनी अस्पतालों को समय पर पेमेंट करेगी, जिससे कैशलेस इलाज में रुकावट नहीं आएगी।
  2. फर्जीवाड़े पर लगाम: इंश्योरेंस कंपनी की निगरानी से फर्जी बिलिंग और गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।
  3. बेहतर नेटवर्क: ज्यादा से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को योजना से जोड़ना आसान होगा।
  4. गंभीर बीमारियों का बेहतर इलाज: गंभीर बीमारियों के लिए बेहतर कवरेज और जल्द क्लेम पास होने की सुविधा मिलेगी।

दो चरणों में लागू होगी नई व्यवस्था

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के अनुसार, इस बदलाव को दो चरणों में लागू किया जाएगा:

  • पहला चरण: सबसे पहले पेंशनर्स को इस बीमा मॉडल में शामिल किया जाएगा।
  • दूसरा चरण: पेंशनर्स की व्यवस्था सफल होने के बाद कर्मचारियों को भी इससे जोड़ दिया जाएगा।

कर्मचारियों और संगठनों की आशंकाएं

जहाँ सरकार इसके फायदे बता रही है, वहीं कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। उनकी मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं:

  • बीमा कंपनियां क्लेम रिजेक्ट कर सकती हैं।
  • कागजी कार्रवाई और शर्तें बढ़ सकती हैं।
  • इलाज के लिए एक सीमा (Limit) तय की जा सकती है।
  • हर बार इलाज से पहले अप्रूवल की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

चिकित्सा मंत्री का बयान

चिकित्सा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि "हमने RGHS का घाटा 700 करोड़ रुपये कम कर दिया है। अगले 6-8 महीनों में सारा घाटा खत्म कर देंगे। योजना को इंश्योरेंस मोड पर लाने से फर्जीवाड़ा बंद होगा और मरीजों को बिना परेशानी इलाज मिल सकेगा।"


निष्कर्ष

RGHS में बीमा मॉडल लागू होने से जहाँ एक ओर समय पर पेमेंट की समस्या सुलझने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी नजर रखनी होगी।

क्या आपको लगता है कि बीमा मॉडल से RGHS की सुविधाएं बेहतर होंगी? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।


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